भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने हैं विस्तार से जाने

इस आर्टिकल में हम देखेंगे कि भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने हैं अगर आप भारतीय नागरिक है तो शायद आपको मूल अधिकार के बारे में तो पता ही होगा। मूल अधिकार किसी कंपनी या फिर सरकार के नहीं होते मूल अधिकार हमेशा एक व्यक्ति के ही होते हैं इस कारण से ही हर व्यक्ति को जीवन जीने का अधिकार मिलता है अगर हम किसी व्यक्ति से उसके मूल अधिकार छीन ले तो उसका जीवन नरक बन कर रह जाएगा।

भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने हैं

क्योंकि मूल अधिकार के बिना हम कुछ भी नहीं कर पाते एक प्रकार से हम जेल के अंदर कैद हो जाते हैं, क्योंकि जब किसी व्यक्ति को जेल में कैद किया जाता है तो उससे मूल अधिकार छीन लिए जाते हैं इसी प्रकार अगर आप से भी आपके मूल अधिकार छीन लिया जाए तो आप एक कैदी बन कर रह जाएंगे और इस वजह आप कोई भी काम या कहीं पर खुद की मर्जी से नहीं जा पाएंगे।

आज के इस आर्टिकल के अंदर हम बात करेंगे कि भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने होते हैं और मौलिक अधिकार क्या होता है इन सभी टोपीक पर आज हम बिल्कुल डिटेल से चर्चा करेंगे मौलिक अधिकार के बारे में लगभग हर एक व्यक्ति को पता होगा लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे भी हैं जिन्हें मौलिक अधिकार के बारे में नहीं पता तो जिन लोगों को मौलिक अधिकार के बारे में नहीं पता उन लोगों को आज का हमारा आर्टिकल पढ़कर मौलिक अधिकार की ए तो जेड जानकारी हो जाएगी।

मौलिक अधिकार क्या होते है

मौलिक अधिकार ऐसे अधिकार होते हैं जिन्हें नहीं तो हमारी सरकार छीन सकती है और ना ही कोई पब्लिक छीन सकती है तो ऐसी अधिकार जो जीवन जीने के लिए अति आवश्यक है और जो नेचुरल है यानी कि नैसर्गिक है ऐसे अधिकारों को मौलिक अधिकार कहा जाता है।

यह मूल अधिकार अमेरिका के संविधान से लाए गए हैं यह मूल अधिकार अमेरिका में लिखित रूप से है और इन मूल अधिकारों को हमने हमारे संविधान के भाग 3 में जगह दी है और भाग 3 में आर्टिकल 12 से 35 तक इनका जिक्र किया गया है संविधान के भाग 3 को मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है यह फ्रेंच भाषा का शब्द है लेकिन इसका प्रयोग ब्रिटेन में हुआ था। अगर आप सोच रहे है की मूल अधिकार को कोई छीन नहीं सकता तो ऐसा कोई फिक्स नहीं होता कि मूल अधिकार को हम से कोई नहीं छीन सकता

कभी आपातकालीन स्थिति में मूल अधिकार को हटाया भी जा सकता है जैसे कि कुछ समय के लिए मूल अधिकार को हटाना निलंबित कहा जाता है और मूल अधिकार को निलंबित राष्ट्रपति कर सकता है। अगर हमें किसी मूल अधिकार से किसी प्रकार की हानि हो रही हो तो उसे संसद द्वारा प्रतिबंध भी किया जा सकता है लेकिन संसद किसी भी मूल अधिकार को प्रतिबंध है नहीं कर सकती मूल अधिकार की रक्षा करने के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को रखा गया है।

भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने हैं

भारतीय सविधान की तरफ से हमें मूल रूप से 7 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए थे लेकिन 14वें संविधान संशोधन 1978 में इनमें से एक मौलिक अधिकार को हटा दिया गया तो इस प्रकार से अगर हम हमारे मुख्य मौलिक अधिकार देकर तो अब इनकी संख्या 7 की जगह 6 रह गई है तो चलिए अब हम देख लेते हैं कि हमारे मौलिक अधिकार है कौन कौन से हैं।

  1. समता या समानता का अधिकार।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार।
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार।
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।
  5. सांस्कृतिक एवं शिक्षा संबंधी अधिकार।
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने हैं

तो दोस्तों ये है हमारे मुख्य छह मौलिक अधिकार तो चलिए इन पर थोड़े डिटेल से बात कर लेते हैं।

1. समता या समानता का अधिकार

हमारा सबसे पहला मौलिक अधिकार है समानता का अधिकार और इस मौलिक अधिकार का जिक्र आर्टिकल 14 से 18 के बीच किया गया है और इस मौलिक अधिकार को पढ़कर आपको पता लग ही गया होगा कि इसका मतलब क्या है फिर भी मैं आपको एक बार बता दूं समता या समानता का अधिकार का मतलब है कि हमारे बीच कहीं पर भी भेदभाव नहीं किया जा सकता हम सभी भारतीय एक समान है।

इस अधिकारी को देने का मुख्य कारण यही था कि पहले के टाइम में लोगों के मन में छोटी जाति के लोगों के प्रति हीन भावना थी उस भावना को दूर करने के लिए ही समानता का अधिकार दिया गया है ताकि सभी भारतीय एक साथ मिलकर रह सके और कोई भी अमीर या गरीब ने हो और कोई भी बड़ा या छोटा ने हो।

2. स्वतंत्रता का अधिकार

दूसरा अधिकार स्वतंत्रता का अधिकार है और इस मौलिक अधिकार का जिक्र आर्टिकल 19 से 22 के बीच किया गया है, यह अधिकार हमें संविधान द्वारा इसलिए दिया गया है ताकि भारतीय नागरिक स्वतंत्र रूप से अपने कार्य कर सकें और अपने आप में विकास कर सके क्योंकि जब नागरिकों के में विकास होगा तो ही तो हमारे देश का विकास हो पाएगा।

स्वतंत्रता के अधिकार में हमें यह अधिकार दिए गए हैं कि हम स्वतंत्र रूप से किसी भी स्थान पर अपनी बात को रख सकती हैं और शांतिपूर्वक किसी भी स्थान पर जमा हो सकते हैं और किसी भी कार्य को करने के लिए उस पर जिक्र करने के लिए सभा भी रख सकते हैं स्वतंत्रता के अधिकार के कारण ही हम पूरे भारत में कहीं पर भी घूम सकते हैं और स्वतंत्रता के अधिकार के कारण ही हम भारत में शांतिपूर्वक रह सकते हैं।

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार

तीसरा मुख्य मौलिक अधिकार है कि शोषण के विरुद्ध अधिकार और मौलिक अधिकार का जिक्र आर्टिकल 22 से 24 के बीच से किया गया है अब आप सोच रहे होंगे कि शोषण के विरुद्ध हमें क्या-क्या अधिकार है, तो दोस्तों पहले हम शोषण के बारे में जान देते हैं। शोषण का मतलब है कि किसी भी व्यक्ति पर अत्याचार करना और अत्याचार दो प्रकार का हो सकता है पहला तो किसी युवा वर्ग पर या फिर किसी बच्चे पर हो सकता है हमने कई बार देखा भी है कि बाल मजदूरी बहुत सी जगह पर कराई जाती है इसे ही शोषण कहते हैं।

शोषण के विरुद्ध अधिकारों में हमें कुछ मुख्य अधिकार दिए गए हैं जैसे कि कोई भी व्यक्ति मानव तस्करी नहीं कर सकता यानी कि आपने कई बार देखा होगा कि लोग अपने मुनाफे के लिए छोटे छोटे बच्चों का बेच देते हैं और शोषण के विरुद्ध अधिकार में हमें इस पर रोक लगाने का अधिकार दिया गया है और मुख्य तौर पर दूसरा अधिकार देखा जाए तो बाल श्रम नहीं करवा सकते अगर कोई भी बाल मजदूरी करवा रहा है तो हम उस पर रोक लगवा सकते हैं।

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

संविधान द्वारा चौथा अधिकार दिया गया है धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और इस अधिकार का जिक्र आर्टिकल 25 से 28 के बीच किया गया है धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब है कि भारत में जितने भी लोग हैं वह लोग हैं अपने हिसाब से अपने धर्म का चुनाव कर सकते हैं इस पर उन्हें किसी प्रकार की रोक नहीं है। आप सब लोगों को तो पता ही होगा हमारा देश एक है धर्मनिरपेक्ष देश है यहां पर राष्ट्र द्वारा हमारे धर्म पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जा सकती।

अगर हम बात करें मुख्य रूप से हमें धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में क्या-क्या अधिकार है तो सबसे पहले कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का धर्म अपना सकता है और अपने धर्म का प्रचार कर सकता है और व्यक्ति किसी भी प्रकार की धर्म सभा में भाग ले सकता है।

5. सांस्कृतिक एवं शिक्षा संबंधी अधिकार

हमारा पांचवा मौलिक अधिकार है संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार इस मौलिक अधिकार का जिक्र आर्टिकल 29 से 30 के बीच किया गया है सांस्कृतिक एवं शिक्षा संबंधी अधिकार का मतलब है कि हमें शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। भारत में स्थित कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जो शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता यह उसका मौलिक अधिकार है और इस अधिकार में हमें सांस्कृतिक संबंधी अधिकार भी दिए गए हैं।

अगर हम बात करें कि सांस्कृतिक एवं शिक्षा संबंधी अधिकार में मुख्य तौर पर हमें क्या क्या अधिकार दिए गए हैं तो इस अधिकार के तहत हर एक व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर सकता है और शिक्षा प्राप्त करने की जरूरत हर व्यक्ति को होती है और इस अधिकारी के तहत कोई भी शिक्षण संस्थान खोला जा सकता है जिससे कि उस जगह की संस्कृति एवं शिक्षा में वर्द्धी हो।

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार

भारतीय संविधान की तरफ से हमें छटा मौलिक अधिकार है संवैधानिक उपचारों का अधिकार दिया गया इस अधिकार का जिक्र आर्टिकल 32 में किया गया है अगर हम बात करें कि संवैधानिक उपचारों का अधिकार में हमें क्या अधिकार दिया गया है। तो इस अधिकार के तहत हमसे अगर कोई हमारे मौलिक अधिकार छीनने की कोशिश करें या छीनना चाहता है, तो उसकी याचिका हम सीधे ही सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में कर सकते हैं, जिससे कि हम हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा कर सकें।

मौलिक अधिकार का महत्व

अगर मैं बात करूं की हमारी जिंदगी में मौलिक अधिकार का महत्व क्या है तो मौलिक अधिकार का महत्व यही है कि इनकी बदौलत ही आज हम अपनी जिंदगी को जी रहे हैं क्योंकि अगर हमारी जिंदगी में मौलिक अधिकार नहीं हो या किसी कारणवश उन्हें छीन लिया जाए तो हमारी जिंदगी में कुछ भी हम अपनी मर्जी से नहीं कर पाएंगे क्योंकि मौलिक अधिकार के कारण ही हम सभी काम अपनी मर्जी से कर पाते हैं।

मौलिक अधिकार हमारी स्वतंत्रता और हमारी आजादी दोनों की रक्षा करते हैं आपने ज्यादातर जगह देखा होगा कि आज काल हम किसी के बीच में भी अंतर नहीं करते चाहे वह अमीर हो चाहे गरीब है यह भी हमारा एक मौलिक अधिकार है इस कारण से ही हम गरीबी और अमीरी के बीच अंतर नहीं करते हैं।

आज के टाइम में आप जितने भी काम कर रहे हैं वे सभी काम आप पर मौलिक अधिकारों के कारण ही कर रहे हैं क्योंकि अगर आपके पास मौलिक अधिकार नहीं होते तो आप पर सरकार कभी भी रोक लगा सकती थी वो भी बिना किसी कारण के और आप सरकार पर कोई सवाल भी नहीं उठा सकते और उस कारण से आपका काम भी रुक सकता था लेकिन मौलिक अधिकार के कारण सरकार आप पर रोक नहीं लगा सकती।

आज के इस में हमने देखा कि भारतीय नागरिक के मौलिक अधिकार क्या क्या होते हैं और कितने होते हैं यह मौलिक अधिकार हमारे हित में होते हैं या नहीं इन सभी विषयों पर आज हमने बिल्कुल डिटेल से चर्चा की है क्योंकि हर एक नागरिक को उसके मौलिक अधिकार के बारे में पता होना चाहिए कि उसे कौन कौन से मौलिक अधिकार प्राप्त है क्योंकि अगर किसी को अपने मौलिक अधिकार के बारे में पता नहीं होंगे तो उसके साथ कोई भी अपराध हो सकता है और वह अपनी जिंदगी अच्छे से नहीं जी पाएगा।

तो अब आप जान गए होंगे कि भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार कितने हैं अगर आपको पोस्ट में दी हुई जानकारी अच्छी लगी हो तो हमारी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि यह जानकारी और लोगों तक भी पहुंच सके और वह भी इसका फायदा उठा सके अगर पोस्ट में दी हुई जानकारी में कोई दिक्कत आ रही है, तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं और आप हमें इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं ऐसी ही जानकारी वाली पोस्ट पढ़ते के लिए।

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