ज्यादातर छाते काले रंग के क्यों होते है जानिए कारण

क्या आप जानते हैं अधिकतर छाते काले रंग के क्यों होते है यदि आप नहीं जानते तो आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताने जा रहे हैं. पुराने जमाने को देखे तो आपको काले छाते ही दिखाई देंगे क्योंकि जब छाते का अविष्कार हुआ तो छाता को काले कलर में ही बनाया गया था और बहुत पुराने समय से हम काले रंग के छाते को इस्तेमाल कर रहे हैं. हालाकि अब फैशन और जरुरत के अनुसार छाते रंग बिरंगे और छोटे बनाये जाने लगे हैं लेकिन अभी भी ज्यादातर छाते काले रंग के ही होते हैं.

ज्यादातर छाते काले रंग के क्यों होते है जानिए कारण

आज के समय भले ही रंग बिरंगे छाते ज्यादा अच्छे लगते हैं लेकिन आपको बता दे कि काले रंग का छाता खरीदना वैज्ञानिकों की द्रष्टि से ज्यादा फायदेमंद साबित होता है. छाते का काम बारिश और धूप से बचाना होता है बारिश के लिए आप कोई सा भी रंग का छाता ले सकते है लेकिन अगर आप धूप से बचने के लिए छाते को ले रहे है तो आपको काला छाता ही लेना चाहिए. तो काले रंग का छाता किस प्रकार फायदेमंद साबित होता है चलिए जानते हैं.

छाते काले रंग के क्यों होते है जानिए कारण

हम सभी जानते है कि काला रंग गर्मी को जल्दी अवशोषित कर लेता है और उतनी ही तेजी से गर्मी को उत्सर्जित भी कर देता है जबकि बाकि के कलर ऐसा नहीं कर पाते हैं. काले छातों के भीतरी साइड सिल्वर कलर होता है जिसकी वजह से गर्मी छाते के अन्दर प्रवेश नहीं कर पाती है और इस तरह आप काले छाते के प्रयोग से गर्मी से बच जाते हैं.

छाते के भीतरी साइड में मौजूद सिल्वर कलर एक मिरर की तरह काम करता है यह गर्म किरणों को छाते से बापस बाहर की तरफ भेजने का काम करता है इस वजह से छाता काला रंग का होने पर भी आपको उसके अन्दर गर्मी नहीं लगती है. साथ ही बारिश में छाता बहुत जल्दी सूख भी जाता है.

इसके अलावा काला छाता सूर्य से आने वाली हानिकारक अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से आपको बचाता है इतना ही नहीं काले रंग का छाता हानिकारक अल्ट्रा वॉयलेट किरणों को आपकी त्वचा तक नहीं पहुँचने देता इससे आप अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से होने वाले त्वचा के रोगों से बच जाते हैं.

तो ऊपर दिए गए कुछ कारणों की वजह से आज भी ज्यादातर छाते काले रंग के होते हैं भले ही आप काले छातों को आउट ऑफ़ फैशन समझे लेकिन ये छाते आपको कई तरह से फायदा पहुंचाते है. ये फायदे आपको रंग बिरंगे छातों में बहुत कम ही देखने को मिलते हैं.

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