कहां से आये थे गांधीजी के तीन बन्दर इसके पीछे की कहानी

आपने बचपन से ही गांधीजी के कई सिद्धांतो के बारे में पढ़ा होगा सुना होगा जिसमें से शायद कई सिद्धांतो पर आपने अमल भी किया होगा गांधीजी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे वह किसी भी तरह असत्य और हिंसा के समर्थक नहीं थे. आपने गांधीजी का एक और सिद्धांत गांधीजी के तीन बन्दर के बारे में जरुर सुना होगा लेकिन क्या आप जानते आखिर कहाँ से आये थे ये तीन बन्दर और गांधीजी से कैसे जुड़ गए थे. अगर नहीं पता तो आज हम आपको बताने वाले है.

गांधीजी के तीन बन्दर
gandhiji

गांधीजी अपने महान सिद्धांतो के चलते दुनिया भर में प्रसिध्द हो गए थे. दुनिया भर से लोग उनसे मिलने आते थे ऐसे ही एक बार चीन का एक प्रतिनिधिमंडल गांधीजी से मिलने आया था. गांधीजी से मिलने के बाद चीन के इस प्रतिनिधिमंडल ने गांधीजी को एक भेंट दी थी जिसमें तीन बंदरों वाली मूर्ति थी.

साथ में ये भी कहा था कि भले ही इस तीन बंदरों की इस मूर्ति की कीमत बच्चों के खिलौने के बराबर हो लेकिन ये हमारे देश यानी चीन में काफी मशहूर है. इस बात को सुन गांधीजी सप्रेम उनकी भेंट को स्वीकार कर लिया था. तभी से ये बन्दर गांधीजी से जुड़ गए आगे चलकर एक सिद्धांत के रूप में विख्यात हुए.

गांधीजी के तीन बन्दर
गांधीजी के तीन बन्दर

बताया जाता है कि गांधीजी के तीन बन्दर के नाम भी है जिनमे पहले बन्दर नाम मिजारू बन्दर है जो अपने आँखों में हाथ रख कर दर्शाता है कि कभी भी बुरा मत देखों, दूसरे बन्दर का नाम मिकाजारू है जो अपने कानों में हाथ रख कर दर्शाता है कि कभी बुरा मत सुनों,

तीसरे बन्दर का नाम मजारू है जो अपने मुंह में हाथ रख कर दर्शाता है कि कभी बुरा मत बोलो, आपको बता दे कि यूनेस्को ने इन्हें अपनी वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया है. जापान में इन्हें काफी बुद्धिमान बन्दर माना जाता है जहाँ का शिंटो सम्प्रदाय इन्हें काफी भी सम्मान देता है.

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