घड़ी का आविष्कार किसने किया और कब हुआ

आज के आर्टिकल में जानेंगे घड़ी का आविष्कार किसने किया और कब हुआ था जैसा कि हम सभी जानते है कि आज के समय हमारी जिंदगी में घड़ी की काफी अहमियत है क्योंकि सुबह उठने के साथ ही हम समय को देखते हैं और इसी समय के साथ हमारा दिन भी गुजर जाता है। छोटा आदमी हो या कोई बड़ा बिजनेसमेन सभी अपना काम समय के हिसाब से करते हैं और समय को देखने के लिए लोग वॉच का सहारा लेते हैं। हालाकि आज घड़ी डिजिटल हो गयी है लेकिन यहाँ तक पहुँचने के लिए घड़ी को सैकड़ों साल लग गए हैं। आज आप जो भी वॉच देखते हैं वह शुरुआत में ऐसी नहीं इसे काफी बदलावों के बाद ऐसा बनाया गया है किसी ने पहले घंटे वाली तो किसी ने मिनिट वाली घड़ी को बनाया था इस तरह इसका निर्माण कई चरणों में हुआ है।

घड़ी का आविष्कार किसने किया

बहुत से लोग सोच रहे होंगे कि जब घड़ी का आविष्कार हुआ ही नहीं था तब लोग समय कैसे देखते थे तो इसके लिए प्राचीन काल में लोग सूर्य की रोशनी का सहारा लेते थे। जबकि बरसात में जब सूर्य नहीं निकलता था तब लोग पानी से भी समय का अनुमान लगा लेते थे। पानी वाली घड़ी के आविष्कार का श्रेय चीन के सु संग नामक व्यक्ति को जाता है लेकिन यह प्रभावी नहीं हुआ करती थी क्योंकि इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जा सकते थे। ऐसे में इन्वेन्टर को पोर्टेबल वॉच बनाने का विचार आया जिसे लोग अपने साथ ले जाने के साथ कभी भी समय देख सके।

घड़ी का आविष्कार किसने किया और कब

आपको बता दे घड़ी का आविष्कार जर्मनी के न्यूरमबर्ग शहर में Peter Henlein ने किया था यह ऐसी वॉच थी जिसे लोग अपने साथ ले जा सकते थे और यह बिलकुल आज की तरह सटीक समय बताती थी। इस घड़ी को आज भी काफी अच्छी तरह से संभाल कर रखा गया है जिसे आप म्यूजियम में देख सकते हैं। पीटर हेनलेन की बनाई घड़ी की तकनीक का उपयोग करके आज की एडवांस वॉच बनाई गयी हैं।

चुकीं पीटर हेनलेन की बनाई घड़ी को लोग अपने साथ पॉकेट में रखकर ले जा सकते थे लेकिन इसमें एक समस्या आ रही थी क्योंकि समय को देखने के लिए इसे बार बार पॉकेट से निकालना पड़ता था। इसी समस्या को खत्म करने का विचार फ़्राँसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल को आया क्योंकि इन्होंने हाथ में पहनने वाली घड़ी को विकसित किया था यह वहीं ब्लेज पास्कल हैं जिन्होंने कैलकुलेटर का भी आविष्कार किया था।

सन 1650 तक लोग वॉच को जेब में रखकर घूमते थे लेकिन इसके बाद ब्लेज पास्कल ने इसी घड़ी को हाथ में बांधने के काबिल बना दिया और यह प्रयास लोगो के अभी तक काम आ रहा है। भले ही आज हमारे पास एडवांस डिजिटल घड़ियाँ हैं लेकिन उन्हें भी हाथ में ही पहना जाता है और हाथ में पहनने वाली इन घड़ियों का विचार ब्लेज पास्कल को आया था।

भारत में घड़ी का आविष्कार

ऐसा नहीं है कि भारत में समय देखने वाली तकनीक बनाने की कोशिश नहीं की गयी थी बल्कि सैकड़ों साल पहले भारत में अंग्रेजी हुकूमत से पहले 18 वीं शताब्दी की शुरुआत में जयपुर के महाराजा जय सिंह द्वितीय ने जयपुर, नई दिल्ली, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में कुल मिलाकर पांच जंतर मंतरों का निर्माण कराया था। इनका निर्माण 1724 और 1735 के बीच पूरा कर दिया गया था यह सभी सूर्य की रोशनी से समय बताते हैं।

घड़ी का आविष्कार किसने किया

बात करे पीटर हेनलेन के द्वारा बनाई गयी घड़ी की तो यह एक डिब्बी के आकार की थी जिसे आप फोटो में देख सकते हैं। इसके निचले हिस्से में छोटे छोटे कलपुर्जे लगे हुए हैं जबकि ऊपरी हिस्सा एक ढक्कन से ढका रहता है जिसे खोला और बंद किया जा सकता है। यह घड़ी तांबे और सोने की बनाई गयी थी जिसकी वर्तमान कीमत 3 से 5 करोड़ यूरो आंकी जाती है।

तो अब आप जान गए होंगे कि घड़ी का आविष्कार किसने किया और कब हुआ यह मनुष्य के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है जो इतिहास वर्तमान और भविष्य सभी समय पर काम आएगी वॉच मनुष्य के लिए इतनी महत्वपूर्ण हो गयी है कि लोग इसके बिना घर से नहीं निकलते। आज के समय हमारे पास घड़ी का आधुनिक रूप स्मार्ट वॉच है जो समय बताने के अलावा मोबाइल, हेल्थ आदि की भी जानकारी देती हैं। आज के समय काफी चीजे विकसित कर ली गयी हैं जो पहले महज एक सपना हुआ करती थी उन्हीं में से एक घड़ी है जिसे पहले सूर्य से पता लगाया जाता था लेकिन इसके विकसित रूप में हम कभी भी कही भी समय देख सकते हैं।

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