आईपीओ क्या होता है इसमें इन्वेस्ट करें या नहीं

आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आईपीओ क्या होता है इसमें इन्वेस्ट करें या नहीं इसके साथ साथ हम और भी बहुत सी चीजों के बारे में जानेंगे जैसे कि आईपीओ कैसे काम करता है आईपीओ लाने के पीछे क्या कारण होते हैं आईपीओ अलॉटमेंट की प्रोसेस क्या होती है आज हम इस आर्टिकल में IPO के ऊपर विस्तार से चर्चा करेंगे। आपने अभी तक म्यूच्यूअल फंड और पुराने शेयर मार्केट में निवेश करने के बारे में जाना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं आने वाले समय IPO भी आपके निवेश करने के तरीके को बेहतर कर सकता है।

आईपीओ क्या होता है

हालाकि इसमें जोखिम भी काफी ज्यादा होता है इसका सबसे ताजा उदाहरण भारतीय पेमेंट कंपनी पेटीएम है और आपने इसके बारे में न्यूज़ अखबार में सुन लिया होगा जब पेटीएम का आईपीओ लांच किया गया था तब से इसकी कीमत में लगातार गिरावट देखी गयी है इसलिए किसी कंपनी का आईपीओ में एंटर करना उसके लिए फायदेमंद या फिर नुकसानदायक भी साबित हो सकता है भारत में अब तक करीब 40 नए आईपीओ लांच किये जा चुके हैं और आगे भी नए आईपीओ का आना जारी रहेगा

दोस्तों यह आर्टिकल बहुत ही मजेदार होने वाला है इसलिए आर्टिकल के आखिर तक बने रहिएगा तो चलिए दोस्तों ज्यादा वक्त ना लेते हुए आर्टिकल को जल्दी से जल्दी शुरू करते हैं। और देख लेते हैं कि आईपीओ का मतलब क्या होता है उम्मीद करता हूं आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आएगा।

आईपीओ क्या होता है

आईपीओ एक प्रक्रिया होती है जो प्राइवेट कंपनी को पब्लिक कंपनी में बदलती है, जब कंपनियों को पैसों की जरूरत होती है या शेयर बाजार में खुद को लिस्ट कराना होता है उस वक्त कंपनियां IPO के जरिए मिली हुई पूंजी को जरूरत के हिसाब से खर्च करती है।

इस फंड का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या कंपनी की तरक्की में किया जाता है यानी कंपनी अपने शेयर लोगों को बेचती है और वे लोग अपनी के शेयरधारक बन जाते हैं। IPO का फुल फॉर्म होता है Initial Public Offering जब कंपनी अपने स्टॉक या शेयर को जनता के लिए पहली बार जारी करती है तब उसे आईपीओ कहा जाता है।

यह प्रक्रिया प्राइमरी मार्केट के अंतर्गत आती है एक कंपनी अपने आईपीओ को एक से अधिक बार भी ला सकती है IPO को ज्यादातर छोटी और नई कंपनियों के द्वारा जारी किया जाता है। IPO कंपनी के लिए एक बहुत बड़ा कदम होता है, यह कंपनी को बहुत सारा पैसा जुटाने में मदद करता है जिससे कंपनी को विकास और विस्तार के लिए अधिक क्षमता मिलती है।

आईपीओ क्या होता है

आईपीओ दो प्रकार के होते है

फिक्स्ड प्राइस आईपीओ

फिक्स्ड प्राइस आईपीओ को इश्यू प्राइस के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, IPO जारी करने वाली कंपनियां आईपीओ जारी करने से पहले इन्वेस्टमेंट बैंक (Investment Bank) के साथ IPO Price के बारे में चर्चा करती हैं। उस Fix Price पर ही इन्वेस्टर्स IPO को सब्सक्राइब कर सकते हैं आप उस निर्धारित प्राइस पर ही आईपीओ को खरीद सकते हैं।

बुक बिल्डिंग आईपीओ

बुक बिल्डिंग आईपीओ के मामले में IPO शुरू करने वाली कंपनियां निवेशकों को शेयरों पर 20% मूल्य बैंड offer करती हैं। निवेशकों द्वारा अंतिम कीमत तय होने से पहले बोली लगाई जाती है। यहां निवेशकों को उन शेयर की संख्या को specify करना होता है जिन्हें वे खरीदना चाहते हैं और इसके साथ वह राशि भी जिसे वे प्रति शेयर भुगतानके लिए तैयार हैं।

जिस शेयर की कीमत सबसे कम होती है उसे फ्लोर प्राइस के रूप में जाना जाता है और जिस शेयर की कीमत उच्चतम होती है उसे कैप प्राइस के रूप में जाना जाता है शेयरों की कीमत से संबंधित अंतिम निर्णय को निवेशकों की बोलियों द्वारा ही निर्धारित किया जाता है।

आईपीओ कैसे काम करता है

IPO से पहले कंपनी को निजी माना जाता है जब कोई कंपनी अपनी विकास प्रक्रिया में एक चरण आगे पहुंच जाती है। तब उसे विश्वास होता है कि वह कठोर नियमों के साथ लाभ और जिम्मेदारियां देने में परिपक्व है और वह कंपनी सार्वजनिक होने के लिए अपनी रुचि का विज्ञापन शुरु कर देती है।

आम तौर पर विकास का यह चरण तब आता है जब कंपनी 1 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंच जाती है और तब इस यूनिकॉर्न का दर्जा भी मिल जाता है हालांकि बाजार की प्रतिस्पर्धा और लिस्टिंग आवश्यकता को पूरा करने के लिए का मूल्यांकन वाली निजी कंपनियां भी IPO के लिए योग्यता साबित कर सकती हैं।

आईपीओ लाने के कारण

IPO को लाने के पीछे निम्नलिखित कारण हैं –

पैसा कमाने का जरिया

IPO लाना कंपनी के लिए पैसे कमाने का एक बहुत बेहतरीन तरीका है कंपनी अपने व्यवसाय को और भी बड़ा और अच्छा बनाना चाहती है तब कंपनी को पैसों की जरूरत होती है और इतना पैसा बगैर IPO के ला पाना संभव नहीं होता।

कंपनी को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए

IPO लाने के बाद कंपनी सार्वजनिक बन जाती है यानी उसका शेयर खरीदकर कोई भी आम आदमी कंपनी का हिस्सेदार बन सकता है लेकिन आम आदमी कंपनी के शेयर को तभी खरीदेगा जब उस कंपनी की एक ब्रांड वैल्यू होगी। IPO के जरिए कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया जाता है और यह किसी भी कंपनी के लिए एक गर्व की बात होती है, लोगों का विश्वास बढ़ जाता है और लोग कंपनी के शेयर खरीदने लगते हैं।

अधिग्रहण और विलय खुल जाता है

जब कोई कंपनी IPO लाती है तब उसके लिए किसी भी कंपनी को खरीदने का यानी अधिग्रहण करने का रास्ता खुल जाता है और वह किसी अन्य कंपनी के साथ विलय भी कर सकती है।

उदाहरण के लिए

जब किसी कंपनी को लगता है कि वह कंपनी ग्रो तो कर रही है लेकिन उसे और अधिक विस्तार की जरूरत है। उस वक्त कंपनी द्वारा आईपीओ को जारी किया जाता है इसके लिए कंपनी बैंक लोन का सहारा भी ले सकती है लेकिन बाद में कंपनी को एक निश्चित समय पर ब्याज के साथ उसे लौटाना भी होता है।

इसलिए कंपनी फंड इकट्ठा करने के लिए आईपीओ का रास्ता अपनाती है इस तरीके से कंपनी को किसी को भी ना पैसा लौटाना पड़ता है और ना ही कोई ब्याज इससे होता है कंपनी का फायदा। अब बात करते हैं IPO खरीदने वाले लोगों के फायदे की जो भी इन्वेस्टर IPO में इन्वेस्ट करते हैं उन्हें खरीदे गए IPO के बदले में कंपनी में कुछ प्रतिशत हिस्सेदारी मिल जाती है।

यानी अगर किसी कंपनी ने IPO के लिए कुछ शेयर निकाले हैं और आपने उन शेयर्स की 2 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है तो आप उस कंपनी के 2 प्रतिशत हिस्से के मालिक बन जाते हैं इस प्रकार से IPO से कंपनी और इन्वेस्टर्स दोनों का ही फायदा होता है।

किसी नई सर्विस या प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए

आईपीओ जारी करने के पीछे कंपनी की एक और वजह होती है कंपनी की अपनी सर्विस और प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग करना। हर कंपनी अपने प्रोडक्ट और सर्विस की शुरूआत करने से पहले उसका अच्छे से प्रमोशन करना चाहती है और चाहती है कि वह प्रोडक्ट या सर्विस ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके, यही वजह है कि कंपनी आईपीओ को जारी करती है।

कर्ज कम करने के लिए या कर्ज उतारने के लिए

जब कोई कंपनी कर्ज में डूब जाती है तब आईपीओ को जारी करती है ऐसे में कंपनी समझती है कि किसी बैंक से लोन लेने की बजाए कंपनी के कुछ शेयर भेज दिया जाए और उससे होने वाली कमाई के जरिए कर्ज का भुगतान कर दिया जाए ऐसा करके कंपनी का कर्ज भी समाप्त हो जाता है और कंपनी को नए इन्वेस्टर्स भी मिल जाते हैं।

आईपीओ में इन्वेस्ट कैसे करें

आईपीओ जारी करने वाली कंपनी इनवेस्टर्स के लिए IPO को 3 से 10 दिनों तक ओपन देती है मतलब आईपीओ आने के 3 से 10 दिन के अंदर अंदर उसे कोई भी खरीद सकता है। कोई कंपनी आईपीओ जारी करने के लिए 3 दिन की अवधि रखती है वहीं कई कंपनियां 3 दिन से अधिक की भी अवधि रखती हैं।

आपको दिए गए निश्चित समय के अंदर ही साइट पर जाकर या रजिस्टर्ड ब्रोकरेज के माध्यम से ही इन्वेस्टमेंट करना होता है अगर आईपीओ फिक्स प्राइस इश्यू  होता है तो उस फिक्स प्राइस पर ही IPO के लिए अप्लाई करना होगा और अगर आईपीओ बुक बिल्डिंग इश्यू है तो आपको उसी बुक बिल्डिंग इश्यू पर bid लगानी होगी।

आईपीओ अलॉटमेंट की प्रक्रिया

जब IPO की ओपनिंग क्लोज होती है तब कंपनी IPO की अलॉटमेंट करती है इस process में कंपनी द्वारा सभी इन्वेस्टर्स को IPO अलॉट किया जाता है और उसके बाद कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज (stock exchange/stock market) में लिस्ट हो जाते हैं। स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने के बाद कंपनी के शेयर को खरीदा और बेचा जाता है जब शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्ट हो जाते हैं तब इन्वेस्टर्स के बीच पैसों और शेयर का एक्सचेंज होता रहता है वैसे आपको बता दें कि स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने से पहले आप शेयर नहीं बेच सकते हैं।

आईपीओ को कैसे पेश किया जाता है

IPO जाने से पहले कंपनी को कुछ नियमो का पालन करना होता है आईपीओ से पहले कंपनी कुछ जरूरी काम करती है और उसके बाद आईपीओ लाने का समय निर्धारित किया जाता है। कंपनी को सार्वजनिक होने से पहले आईपीओ को संभालने के लिए एक निवेश बैंक को काम पर रखा जाता है कंपनी और निवेश बैंक आपस में समझौता करके वित्तीय विवरण पर काम करते हैं।

उसके बाद कंपनी और निवेश बैंक समझौते के तहत SEC के साथ पंजीकरण के लिए एप्लीकेशन दाखिल करते हैं। SEC बाद में एप्लीकेशन में दी गई जानकारी की जांच करता है और अगर सारी जानकारी सही मिलती जाती है तब यह IPO की घोषणा के लिए तारीख की अनुमति प्रदान कर देता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आईपीओ के मामले में एक डीमैट खाता ही पर्याप्त होता है ट्रेडिंग खाता होना जरूरी नहीं है।
  • लेकिन जब आप लिस्टिंग पर शेयर को बेचना चाहेंगे तब आपको ट्रेडिंग खाता की आवश्यकता होगी, यही कारण होता है कि जब आप IPO के लिए पहली बार आवेदन करते हैं तब ब्रोकर के द्वारा आपको डीमैट अकाउंट खोलने के साथ साथ एक ट्रेडिंग अकाउंट खोलने की सलाह दी जाती है।
  • IPO लाने वाली कंपनियों को भारती प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) यानी SEBI के नियमों का सख्ती से पालन करना होता है।
  • जब आप IPO के लिए आवेदन करते हैं तब यह ऑफर नहीं बल्कि ऑफर का आमंत्रण होता है और जब आपको IPO जारीकर्ता के द्वारा शेयरों की पेशकश की जाती है तब यह एक प्रस्ताव होता है।
  • आपको कंपनी के आईपीओ वैल्यूएशन (IPO Valuation) के बारे में विस्तार से जानकारी जुटा लेनी चाहिए।
  • किसी भी IPO को सब्सक्राइब करने से पहले ही एक निवेशक के तौर पर आपको यह तय कर लेना चाहिए कि आप इस पर लिस्टिंग गेन का फायदा उठाना चाहते हैं या इसमें लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं।
  • कभी कभी कुछ शेयरों के मामले में ऐसा होता है कि लिस्टिंग गेन बहुत ज्यादा प्राप्त होता है लेकिन जरूरी नहीं कि आगे भी इसमें तेजी बनी रहे।

क्या आईपीओ में इन्वेस्ट करना चाहिए

IPO में निवेश करना एक अच्छा विचार है लेकिन हर एक IPO में निवेश करना सही नहीं है क्योंकि हर आईपीओ की कैटेगरी अलग होती है। शुरुआती समय में सार्वजनिक पेशकश एक सुविधाजनक मंच प्रस्तुत कराती है विशेष रूप से शुरुआती निवेशकों के लिए आईपीओ उन लोगों के लिए बेहतरीन मौका होता है जो बाजार में संभव दरों में प्रवेश कर सकते हैं।

तो दोस्तों कैसा लगा आपको हमारा यह आर्टिकल इस आर्टिकल में हमने जाना कि आईपीओ क्या होता है इसमें इन्वेस्ट करें या नहीं इसके साथ साथ हमने और भी बहुत कुछ जाना जैसे कि आईपीओ को कैसे पेश किया जाता है आईपीओ कैसे काम करता है आईपीओ लाने के क्या कारण होते है दोस्तों इस विषय पर हमने आर्टिकल में विस्तार से चर्चा की है। आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा और इसमें दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।

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