माचिस का आविष्कार किसने किया था और कब | Machis Ka Avishkar Kisne Kiya Tha

आज जानेंगे माचिस का आविष्कार किसने किया था और कब Machis Ka Avishkar Kisne Kiya Tha माचिस का उपयोग तो सभी करते हैं और इसके बारे में भी आपको जानकारी होगी ही कि माचिस का आविष्कार करने से पहले आग जलाने का काम काफी मुश्किल था। इसके लिए दो पत्थरों को आपस में रगड़ा जाता था लेकिन माचिस के आविष्कार ने आग जलाने की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है लेकिन अब बात आती है कि आखिर माचिस का आविष्कार किसने किया था, यह अपने आप में ही काफी बड़ा सवाल है।

अगर आपको इस बारे में जानकारी नहीं है तो आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको माचिस के आविष्कार के बारे में विस्तार से बताएंगे।

इस आर्टिकल को पढ़कर आपको बड़ा आनंद आने वाला है, तो चलिए वक्त बर्बाद ना करते हुए आर्टिकल को जल्दी से जल्दी शुरू करते हैं और जान लेते हैं कि माचिस का आविष्कार किसने किया था, उम्मीद करता हूं कि आपको हमारे यह आर्टिकल पसंद आएगा।

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माचिस क्या होता है | Machis Meaning In Hindi

माचिस शब्द को अंग्रेजी के मैच शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब होता है बत्ती या लैंप की नोक, माचिस एक घरेलू सामान है, माचिस को आग जलाने के लिए प्रयोग में लिया जाता है।

‘माचिस’ को लकड़ी के छोटे डंडे या पक्के कागज से बनाया जाता है, इसके एक सिरे पर एक ऐसी सामग्री लगी होती है जहां तीली को रगड़ने से घर्षण उत्पन्न होता है और बाद में उसे आग जलाने लगती है।

माचिस का इस्तेमाल हर तरह के काम में किया जाता है चाहे वह काम छोटा हो या बड़ा, कुछ लोग माचिस का उपयोग अच्छे कामों के लिए करते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे गलत कामों के लिए भी प्रयोग करते हैं, लेकिन आपको माचिस का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए ही करना चाहिए।

माचिस का आविष्कार किसने किया था और कब

माचिस का आविष्कार ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन वॉकर ने 31 दिसंबर 1827 को किया था, उन्होंने एक ऐसी माचिस की तीली बनाई थी जिसे किसी भी खुरदरी जगह पर रगड़ा जाता तो वह जलने लगती थी, उस समय यह बहुत ही खतरनाक था और इससे काफी लोग दुर्घटना के शिकार भी हुए थे।

आपको बता दें कि इसमें पोटेशियम क्लोरेट, गोंद, स्टार्च, एंटीमनी सल्फाइड को लकड़ी पर लपेटा गया था, और बाद में इस लेप को सूखने के बाद खुरदरी सतह पर रगड़ा गया था, और फिर इससे आग जलाई गई थी।

बाद में सैमुअल जॉन्स नाम के किसी व्यक्ति ने इसका पेटेंट करवा लिया था, जिसका नाम लूसीफर मैच था, नीदरलैंड में तो मैचों को अभी भी लूसीफर के नाम से जाना जाता है।

माचिस का क्या इतिहास है

माचिस की तीली बनाने की पहली कोशिश साल 1680 में रॉबर्ट नाम के एक आयरिश भौतिक वैज्ञानिक ने की थी, आग जलाने के लिए उन्होंने फास्फोरस और सल्फर का प्रयोग किया था।

दुर्भाग्य से उनके प्रयासों का कोई सफल नतीजा नहीं निकल सका क्योंकि प्रयोग की गई सामग्री बहुत ही ज्यादा ज्वलनशील थी।

उसके बाद एक सदी बीत गई, लेकिन शोधकर्ताओं के द्वारा अभी भी संरक्षित विधि का विकास नहीं हो पाया था कि कैसे एक आत्मरोशनी की लौ बनाई जा सकती है और फिर आम जनता के द्वारा इसका प्रयोग हो सके।

सेफ्टी मैच बनाने की कुछ प्रेरणा 17वीं शताब्दी के मध्य में केमिस्ट हेनिंग ब्रांट के अलग अलग संशोधनों के जरिए मिली थी, उन्होंने अपना पूरा जीवन अलग अलग धातुओं से सोने को शुद्ध करने में लगा दिया था।

उन्होंने अपने शोध के दौरान यह पता लगाया कि शुद्ध फास्फोरस को कैसे निकाला जा सकता है, और इसके दिलचस्प दहनशील गुणों का परीक्षण कैसे किया जा सकता है।

उन्होंने अपनी इस बेहतरीन जांच में फास्फोरस को अलग करने की विधि को संशोधित किया था, उनके द्वारा बनाए गए नोट्स भविष्य की संभावित खोजों में एक मील का पत्थर साबित हुए थे।

आधुनिक माचिस की खोज किसने की थी

आधुनिक माचिस की खोज का श्रेय ब्रिटेन के वैज्ञानिक जॉन वॉकर को जाता है, उन्होंने माचिस का आविष्कार 31 दिसंबर 1827 को किया था, लेकिन उनके द्वारा बनाई गई माचिस का इस्तेमाल करने में काफी मेहनत लगती थी।

उनकी माचिस को इस्तेमाल करने में बहुत ही अधिक खतरा होता था, उनके द्वारा बनाई गई इस माचिस में खुरदरी सतह या फिर लकड़ी पर मलते ही आग लग जाती थी, इस माचिस को बनाने के लिए लकड़ी की तीली पर पोटेशियम क्लोरेट, एंटीमनी सल्फाइड, 

बबूल की गोंद या स्टार्च लगाया जाता था, लेकिन जब उनकी इस माचिस का इस्तेमाल होने वाला होता तो इसमें से चिंगारियां निकलती और छोटे-छोटे विस्फोट भी होते थे, इसके साथ साथ तीली पर लगे मसाले से जलते समय काफी दुर्गंध भी आती थी।

माचिस की तीली में कौन सी लकड़ी का प्रयोग किया जाता है

आमतौर पर सभी लोग यह जरूर जानते हैं कि कौन सी कंपनी की माचिस की तीली अच्छी होती है और कितने लंबे समय तक जलेगी, लेकिन ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि माचिस की तीली को कौन से पेड़ की लकड़ी से बनाया जाता है।

वैसे तो माचिस की तीलियों को बहुत से पेड़ की लकड़ियों से बनाया जाता है लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे अच्छी माचिस की तीलियों को अफ्रीकी ब्लैकवुड से बनाया जाता है।

पापलर नाम के पेड़ की लकड़ी से बनी माचिस की तीली को भी काफी अच्छी माना जाता है, बहुत सी कंपनियां ज्यादा लाभ कमाने के लिए माचिस की तीली को जलाऊ लकड़ी से भी तैयार करते हैं, इस तरह की माचिस ज्यादा देर तक नहीं जलती हैं, और जल्दी बुझ जाती हैं।

माचिस में कौन सा रसायन (केमिकल) प्रयोग होता है

माचिस की तीली पर फास्फोरस मसाले का प्रयोग किया जाता है जो कि बहुत ही ज्यादा ज्वलनशील रसायनिक तत्व होता है, जब हवा इसके संपर्क में आती है तो यह अपने आप जलने लगता है, इसी वजह से माचिस की तीली पर मिलावटी फास्फोरस को लगाया जाता है।

इसके अंदर लाल फास्फोरस, गोंद, पोटेशियम क्लोरेट, सल्फर, पिघला हुआ कांच और स्टार्च का लेप लगाया जाता है, अगर माचिस की तीली को साधारण लकड़ी से बनाया जाए तो उसके ऊपर अमोनियम फॉस्फेट एसिड का लेप लगाया जाता है।

घर के मंदिर में माचिस को न रखें

आप सोच रहे होंगे कि घर के मंदिर में माचिस को क्यों नहीं रखना चाहिए तो आपको बता दें कि घर के मंदिर से हमे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और वैसे देखा जाए तो माचिस एक विनाशकारी उपकरण होता है, माचिस को हमें घर के मंदिर में बहुत कम या नहीं रखना चाहिए, ताकि आप नकारात्मक उर्जा से बच सकें।

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माचिस की तीली में फास्फोरस मसाले का प्रयोग होता है, आपको बता दें कि फास्फोरस बहुत ही ज्यादा ज्वनशील रसायनिक तत्व होता है।

माचिस की डिब्बी से तीली निकालकर उसे माचिस की कम चौड़ाई वाली साइड से रगड़ा जाता है, रगड़ने पर तीली जलने लगती है, माचिस की तीली केवल तभी जलेगी जब उसे माचिस की साइड वाली खुरदरी सतह पर रगड़ा जाएगा।

आमतौर पर माचिस की तीली एक ऐसी लकड़ी से बनी होती है जो आसानी से आग पकड़ लेती है, इसके एक सिरे पर फास्फोरस युक्त पदार्थ का लेप लगाया जाता है। इस सिरे को जब किसी घर्षणयुक्त तल पर रगड़ा जाता है तो आग उत्पन्न होने लगती है, माचिस की तीलियों के सिरे पर फास्फोरस से बने पदार्थ का लेप लगाने के लिए जिलेटिन का इस्तेमाल किया जाता है।

माचिस की तीली पर फास्फोरस से बने मसाले का प्रयोग होता है, माचिस की तीली के सिरे पर मौजूद फास्फोरस सल्फाइड नाम के रसायन की वजह से माचिस की तीली जलने लगती है, इसमें पोटेशियम क्लोरेट, ग्लू, सल्फर, स्टार्च, पीड़ा हुआ ग्लास और लाल फास्फोरस जैसे पदार्थ होते हैं।

तो कैसा लगा आपको हमारा यह आर्टिकल, इस आर्टिकल के जरिए हमने जाना कि Machis Ka Avishkar Kisne Kiya Tha इस आर्टिकल में हमने आपको माचिस का आविष्कार / माचिस की खोज के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की है।

हमारी तरफ से हमेशा यही कोशिश रहती है कि हम आपके सामने संपूर्ण और सही जानकारी विस्तारपूर्वक तरीके से पेश कर पाएं, और आप जो जानकारी जानने के लिए हमारे इस आर्टिकल में आए हैं, वह जानकारी आपको प्राप्त हो जाए। उम्मीद करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा है।

Conclusion

अगर आपको हमारा यह आर्टिकल Machis Ki Khoj Kisne Ki Thi / माचिस का आविष्कार किसने किया था अच्छा लगा है, तो इसे अपने दोस्तों और करीबियों के साथ शेयर जरूर कीजिएगा। आज के लिए इतना बहुत है, जल्द ही मिलते हैं, किसी नए आर्टिकल में नए टॉपिक के साथ। अगर आपको इस आर्टिकल में कुछ भी समझ नहीं आया है, या आप कोई और जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक हैं, या हमारे लिए आपके पास कोई और सुझाव है।

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